💡 'माध्यम' सॉफ़्टवेयर के विकास की ज़रूरत क्यों पड़ी?
माध्यम के विकासकर्ता बालेन्दु शर्मा दाधीच एक राष्ट्रीय टेलीविज़न चैनल में कार्यरत थे, जब उन्होंने देखा कि दूसरे टीवी चैनलों की तरह वहाँ भी हिंदी के कार्यक्रमों के लिए स्क्रिप्ट रोमन लिपि में लिखी जाती थी। उन्होंने चैनल के जिम्मेदार लोगों से पूछा कि वहाँ हिंदी में स्क्रिप्ट लिखने के लिए सॉफ़्टवेयर क्यों उपलब्ध नहीं है? उत्तर मिला कि इसकी आवश्यकता महसूस नहीं होती क्योंकि एंकर तथा अन्य सहयोगी रोमन लिपि में लिखी हिंदी सामग्री को पढ़ने के अभ्यस्त हो चुके हैं; और हिंदी में काम करने के लिए अलग से महंगे सॉफ़्टवेयर खरीदने पड़ेंगे जो व्यर्थ का वित्तीय भार बढ़ाएंगे।
बालेन्दु को यह स्थिति नागवार गुज़री—हिंदी में काम करने के लिए अंग्रेज़ी अक्षरों का सहारा लेना किसी भी रूप में स्वाभाविक नहीं था। क्या अंग्रेज़ी में काम करने के लिए कोई देवनागरी लिपि में स्क्रिप्ट लिखेगा?
तब बालेन्दु ने निश्चय किया कि इस परिस्थिति को बदलने के लिए उन्हें स्वयं पहल करनी होगी। उन्होंने तत्कालीन लोकप्रिय कृति देव फ़ॉन्ट का उपयोग करते हुए भारत सरकार की आधिकारिक इनस्क्रिप्ट टाइपिंग पद्धति पर आधारित वर्ड प्रोसेसर विकसित किया, जिसे 'माध्यम' नाम दिया गया। उद्देश्य धनोपार्जन नहीं बल्कि भाषाई स्वाभिमान था, अतः इसे इंटरनेट पर तथा देश की शीर्ष पत्रिकाओं (Digit एवं Chip) की सीडी/डीवीडी के माध्यम से राष्ट्रव्यापी रूप से निःशुल्क वितरित किया गया। सॉफ़्टपीडिया (Softpedia) ने इसे 100% Clean & Safe घोषित किया और पहले पाँच वर्षों में ही इसके एक लाख से अधिक डाउनलोड्स हो चुके थे।