💡 'स्पर्श' सॉफ़्टवेयर के विकास की ज़रूरत क्यों पड़ी?
कंप्यूटर तथा दूसरे डिजिटल माध्यमों पर हिंदी तथा दूसरी भारतीय भाषाओं में कार्य करने के लिए भारत सरकार के विभिन्न प्रौद्योगिकी संस्थानों (जैसे C-DAC और DoE) ने लंबे परिश्रम तथा शोध के बाद एक अत्यंत उन्नत और वैज्ञानिक टाइपिंग पद्धति का विकास किया था, जिसका नाम है — इनस्क्रिप्ट (InScript)। यह भारतीय भाषाओं के लिए कीबोर्ड लेआउट के रूप में विंडोज़, मैक, लिनक्स, एंड्रॉयड तथा आईओएस आदि सभी ऑपरेटिंग सिस्टमों पर पहले से उपलब्ध है।
फिर भी इसे भारतीय भाषाओं के प्रयोक्ताओं के बीच उतनी लोकप्रियता नहीं मिल सकी जितनी मिलनी चाहिए थी। अत्यंत तेज़ तथा शुद्ध टाइपिंग में सक्षम इनस्क्रिप्ट कीबोर्ड लेआउट को लोकप्रिय बनाने में सबसे बड़ी दुविधा यह थी कि इस टाइपिंग पद्धति को सिखाने के लिए कोई समर्पित, सुगम और निःशुल्क प्रशिक्षण सुविधा उपलब्ध नहीं थी। लोग नई तकनीकों को सीखने में झिझकते थे या फ़ोनेटिक पद्धतियों की ओर मुड़ जाते थे।
स्पर्श के विकासकर्ता बालेन्दु शर्मा दाधीच का मानना है कि हिंदी तथा दूसरी भारतीय भाषाओं में डिजिटल माध्यमों पर सामग्री इनपुट के लिए इनस्क्रिप्ट ही वर्तमान में उपलब्ध साधनों के बीच सर्वश्रेष्ठ है। यदि हमें लोगों को टाइपिंग की समस्याओं से हमेशा के लिए मुक्ति देनी है तो इस कीबोर्ड लेआउट को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से उन्होंने एक पूर्ण ट्यूटर बनाकर आम नागरिकों के लिए निःशुल्क उपलब्ध कराया ताकि हर कोई हिंदी में शुद्ध और तीव्र टाइपिंग सीख सके।